उष्णकटिबंधीय दलदल की आग ने 2000 साल के अधिकतम स्तर तक पहुंच गई है। और इसके पीछे इंसान हो सकता है।
ग्लोबल चेंज बायोलॉजी (यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर) में प्रकाशित एक नई अध्ययन ने चार महाद्वीपों में दलदल की परतों में कार्बन का विश्लेषण किया और पिछले 2,000 वर्षों की आग के इतिहास को पुनर्निर्मित किया।
नतीजे बहुत आशाजनक नहीं हैं:
- दलदल में सभी विश्व के जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन संग्रहीत होता है
- सदीयों से उष्णकटिबंधीय दलदल की आग घटती रही— प्राकृतिक जलवायु चक्रों के अनुरूप
- 20वीं सदी में इस प्रवृत्ति में नाटकीय बदलाव आया — आग तेज़ी से अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ी
- सबसे बड़ा वृद्धि दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलेसिया में दर्ज हुई, जहाँ दलदल को कृषि और निर्माण के लिए जल निकासी किया जाता है
- दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के दूरस्थ क्षेत्रों में अभी तक यह प्रवृत्ति नहीं दिखी — लेकिन जनसंख्या और कृषि के विस्तार के साथ जोखिम बढ़ रहा है
यह क्यों महत्वपूर्ण है? जब दलदल जलते हैं, तो वे हजारों वर्षों में संग्रहीत विशाल मात्रा में कार्बन जारी करते हैं। यह ऐसा है जैसे बड़े भूमिगत CO₂ ट्रेजर को खोलकर उसे वायुमंडल में छोड़ देना।
समाधान हैं दलदल की सुरक्षा, पारिस्थितिक तंत्रों की पुनर्स्थापना और सतत प्रबंधन। लेकिन यह देशों के बीच सहयोग और पर्याप्त पैमाने की आवश्यकता रखता है।
स्रोत: Wang, Y. et al., Global Change Biology, 2026 | University of Exeter / ScienceDaily, 19. 3. 2026
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